सामाजिक एकता की मिसाल देता है हरियाणा का ये गांव, क्या ईद और क्या दिवाली मनाते है साथ - सा

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सामाजिक एकता की मिसाल देता है हरियाणा का ये गांव, क्या ईद और क्या दिवाली मनाते है साथ - सा

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Haryana khabar : हरियाणा प्रदेश में नूंह हिंसा के बाद से तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। वही एक ऐसा गांव जो आज भी इस धर्म भेद की दीवार को तोड़ता है , बीती रात में कुछ असामाजिक तत्व रोहतक के कलानौर कस्बे में घुस गए और उत्पात मचाने लगे। हालांकि, इस दौरान कस्बे में समस्या होते- होते टली गई ।


वहीं यहां से कुछ किलोमीटर की दूरी पर तैमूरपुर गांव (Taimurpur) मौजूद है । जिसमे प्रेम सौहार्द का सूरज नहीं डूबा। इस छोटे गांव में धार्मिक सौहार्द की मिसाल प्रस्तुत की जाती है, जो शायद किसी बड़े शहर से भी कहीं बेहतर हो सकती है।

तैमूरपुर गांव, जो कि हरियाणा के नूंह जिले में स्थित है, सिर्फ आबादी की दृष्टि से छोटा हो सकता है, लेकिन धार्मिक सौहार्द को लेकर यह बहुत बड़ा है। इस गांव में मंदिर और मस्जिद की दीवारें सांझी हैं, जो धार्मिक भाईचारे की मिसाल पेश करती हैं। यहां पर मस्जिद में ही पाठशाला का प्रचार होता था, और इसके बाद भी दोनों वक्त अजान की गई है। यह संकेतित करता है कि धार्मिक स्थलों के माध्यम से समरसता की महत्वपूर्ण सिख दी जाती है।

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गांव के पूर्व सरपंच विनोद कुमार मेहरा के अनुसार, यहां की आबादी कृषि पर निर्भर है और यहां के लोग मुख्य रूप से खेती मजदूरी करके अपनी आजीविका चलाते हैं। गांव के कई युवा सरकारी नौकरियों में भी हैं। इसके अलावा, यह गांव अपने आप में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है क्योंकि यहां के लोगों की सोच उनके छोटे आकार से बड़ी है।

तैमूरपुर गांव में अलग धर्मों के लोगों के बीच समरसता और आपसी समझ की उदाहरणमाला है। गांव में तीज और ईद जैसे त्योहार एक साथ मनाए जाते हैं, और घरों में मिठाइयां और सेवइयां बांटी जाती हैं। यहां के लोग दिखावे की बजाय दिल से धार्मिक भाईचारा की महत्वपूर्णता को समझते हैं।

तैमूरपुर गांव के सरपंच विनोद कुमार ने यह भी बताया कि गांव में हालात की तरह कोई बदलाव नहीं हुआ है, और लोग आपस में मिलकर रहते हैं। वह यहां के लोगों से अपील करते हैं कि वे इस धार्मिक सौहार्द और आपसी समझ को बनाए रखें ताकि वे तनावमुक्त और शांतिपूर्ण जीवन जी सकें।

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धार्मिक सौहार्द ने बुना बंधन

इस तरीके से, तैमूरपुर गांव हमें एक ऐसे समाजिक संरचना की दिशा में प्रेरित करता है जो वास्तविक भाईचारे, समझदारी और सहयोग के माध्यम से आदर्श हो सकती है। इस गांव की मिसाल से हमें यह सिख मिलती है कि धार्मिक विभाजनों के बावजूद एकता की शक्ति भाईचारे के माध्यम से हमेशा मजबूत बनी रह सकती है।

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