हरियाणा में नही काम कर रहा "बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ" का फॉर्मूला, लिंगानुपात की स्तिथि चिंताजनक

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हरियाणा में नही काम कर रहा "बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ" का फॉर्मूला, लिंगानुपात की स्तिथि चिंताजनक

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Haryana khabar : हरियाणा प्रदेश में लिंगानुपात में हो रही बदलती स्थिति का संक्षिप्त आकलन करते हुए पाया गया है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू किए गए 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' अभियान के बाद भी प्रदेश में लिंगानुपात में वृद्धि हो रही है। वर्ष 2019 में यह अंक 923 पर पहुंच गया था, जो कि वर्ष 2015 की तुलना में 906 पर आ गया है। यह मामूले के स्तर पर 17 अंकों की गिरावट को दर्शाता है, जो कि गर्भवती महिलाओं की छवि के अभिन्न हिस्से के रूप में हमें प्रस्तुत होती है।

 

 

हरियाणा प्रदेश के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में आठ जिलों में यह चिंताजनक अंक है, जहां लड़कों की तुलना में कम बेटियाँ जन्म रही हैं। इसमें रोहतक, महेंद्रगढ़, सोनीपत, करनाल, चरखी दादरी, कैथल, भिवानी और गुरुग्राम शामिल हैं।

कुछ वर्षों में हुई 17 अंकों की गिरावट के साथ, प्रदेश में बेटियों के जन्म को बढ़ावा देने के लिए कई पहलू होने चाहिए। वर्ष 2014 में यह अंक 871 था, जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' अभियान की शुरुआत की थी, ताकि कोख में बेटियों की हत्या का दाग धुल सके। इस अभियान के बावजूद यह बदलती स्थिति चिंताजनक है और सोचने की बात है कि क्या इसके पीछे कुछ गहरी समस्याएँ छिपी हैं जो हमें समय पर पहचाननी चाहिए।

पीएम मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत, बेटियों की सुरक्षा और उनके शिक्षा को बढ़ावा देने का उद्देश्य था, लेकिन इस अभियान की अवश्यकता आज भी बनी हुई है। लिंगानुपात में गिरावट को रोकने के लिए, समाज को जागरूक होने और बेटियों के प्रति जागरूकता फैलाने की आवश्यकता है, ताकि हम सब मिलकर इस चुनौती का सामना कर सकें।"

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